40 घंटे से सुकमा में बाढ़ का संकट, कई मोहल्लों में पानी घुसा; घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचे लोग, रातभर चला रेस्क्यू
Sukma
तीन दिन की लगातार बारिश ने जिला मुख्यालय सुकमा की तस्वीर बदल दी है। करीब 40 घंटे से बाढ़ के हालात बने हुए हैं और मुख्यालय का करीब 25 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इसकी चपेट में है। निचले इलाकों में पानी घरों तक पहुंच गया, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाना पड़ा। हालात ऐसे बने कि प्रशासन को रात के अंधेरे में नाव उतारकर ग्रामीणों को निकालना पड़ा। मुख्यालय और आसपास के इलाकों में हजार से अधिक लोग राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं।

बाढ़ के बीच सबसे बड़ी चुनौती उन गांवों में सामने आई, जहां सड़क और संपर्क मार्ग पानी में डूब गए। छिंदगड ग्राम पंचायत ओलेर के आश्रित ग्राम धुरमापारा में शबरी और आकुर नाला के बीच पानी भरने से 38 घर प्रभावित हुए। देखते ही देखते हालात बिगड़ने लगे। प्रशासन ने पहले स्थानीय संसाधनों से लोगों को निकालना शुरू किया। ट्रैक्टर के जरिए करीब 50 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद रात करीब 8 बजे जलस्तर बढ़ने पर SDRF की टीम नाव लेकर पहुंची और 12 अन्य लोगों को भी सुरक्षित बाहर निकाला।
रात 12 बजे पहुंची टीम, 44 लोगों को निकाला

बाढ़ का दूसरा बड़ा संकट शबरी नदी के किनारे बसे सुकमा के कवासीरास के आश्रित ग्राम कुर्मीरास में सामने आया। मूसलाधार बारिश से गांव के 19 घर प्रभावित हुए। इतना ही नहीं, कवासीरास से गांव को जोड़ने वाला करीब 2 किलोमीटर का मुख्य रास्ता भी पूरी तरह बंद हो गया। गांव चारों तरफ से पानी से घिर गया और बाहर निकलने का रास्ता नहीं बचा। ऐसे हालात में रात करीब 12 बजे SDRF की टीम ने करीब 1.8 किलोमीटर का जोखिम भरा रास्ता तय कर गांव में पहुंच बनाई। इसके बाद टीम ने वहां फंसे 44 ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकाला। अंधेरे, पानी और विपरीत परिस्थितियों के बीच हुआ यह रेस्क्यू ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत रहा।
दो गांवों से 106 लोग निकाले, बाकी इलाकों में भी नजर
छिंदगढ़ विकासखंड के धुरमापारा और कुर्मीरास में हुए रेस्क्यू ऑपरेशन में कुल 106 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। प्रशासन के मुताबिक दोनों स्थानों पर समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो हालात और गंभीर हो सकते थे। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में पहुंच रही हैं। एसडीएम छिंदगढ़ पीवी खेस और जनपद सीईओ शंकर बघेल समेत अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी करते रहे। पुलिस, SDRF, पंचायत और राहत दलों की टीमें अलग-अलग इलाकों में सक्रिय हैं।
राहत शिविरों में पहुंचाए गए लोग, घरों में घुसा पानी

सुकमा मुख्यालय के कई निचले इलाकों में पानी भरने के बाद लोगों को घर खाली करने पड़े। बड़ी संख्या में परिवारों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। हजार से अधिक लोगों के शिविरों में पहुंचने के बाद प्रशासन के सामने भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य और रहने की व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती भी है। बारिश थमने के बाद कई इलाकों में पानी कम होने लगा है, लेकिन संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। जलस्तर घटने के साथ जहां कुछ परिवार अपने घरों की ओर लौटने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं कई इलाकों में अब भी पानी और कीचड़ जमा है। लोगों के सामने अब घरों की सफाई, सामान बचाने और हुए नुकसान का आकलन करने की चुनौती है।
सुकमा में यह सिर्फ बारिश का असर नहीं है, बल्कि पिछले 40 घंटों से शहर और आसपास के गांवों की जिंदगी पर लगा ब्रेक है। सड़कें डूबी हैं, घरों में पानी पहुंचा है और सैकड़ों परिवार सुरक्षित ठिकानों पर हैं। प्रशासन का रेस्क्यू अभियान जारी है, लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य होने में अभी वक्त लग सकता है।






