Sukma
कोण्टा के वेलपोच्चा गांव में वन विभाग द्वारा कराए जा रहे, सीपीटी पशु अवरोध कंती निर्माण कार्य के विरोध एवमं वनाधिकार कानून के तहत पट्टा नही देने को लेकर लामबंद हुए ग्रामीण । दरअसल 26 अक्टूबर के मेहता पंचायत के वेलपोच्चा गांव के 37 परिवार के लोग आदिवासी नेता मनीष कुंजाम से मिलने सुकमा पहुंचे थे। ग्रामीण परिवारों की शिकायत थी कि वन विभाग द्वारा पुलिस बल का प्रयोग करते हुए पशु अवरोध कंती सीपीटी कार्य कराया जा रहा है, और यह कार्य हमारे खेतों के बीच से गुजर रहा है । और जब ग्राम वासियों द्वारा इसे रोकने कार्य नही करने के लिए कहा गया तो, वन विभाग के बीट गाॅड द्वारा डराया धमकाया जा रहा है । ग्रामीणों की समस्याओं को सुनते हुए मनीष कुंजाम ने कलेक्टर व डीएफओ से ग्रामीणों से मुलाकात कराने का प्रयास किया गया किंतु मुख्यालय में कलेक्टर और डीएफओ की मौजूदगी नही होने के कारण ग्रामीणों की मुलाकात नही हो पाई । जिसके बाद मनीष कुंजाम द्वारा दूरभाष के माध्यम से डीएफओ सुकमा से ग्रामीणों की बात कराई गई । और डीएफओ ने एसडीओ को भेज पुरे मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया गया था । जिसके बाद बस्तरिया राज मोर्चा के पदाधिकारियों का एक सदस्यीय दल जिला पंचायत उपाध्यक्ष महेश कुंजाम के नेतृत्व में वेलपोच्चा गांव पहुंचा । और तकरीबन एकत्रित बीस गांव के आसपास के ग्रामीणों की समस्याओं को सुना । इस दौरान वन विभाग के एसडीओ रेंजर मौजूद थे ।
4 दशक से नक्सल प्रभावित रहे लोगों को ना राजस्व पट्टा ना ही वनाधिकार पट्टा और फिर धमकी

कोण्टा रेंज के अंतर्गत आने वाले वेलपोच्चा सहित मेहता पंचायत के आश्रित गांवों के ग्रामीणों को बीते चार दशक से राजस्व पट्टा और ना ही वनाधिकार पट्टा मिला है । और ऊपर से वन विभाग के कर्मचारी द्वारा धमकी दिया जा रहा है । आज भी ऐसे दर्जनों गांव है जिन्हें पट्टा नही मिला है। जनसंख्या सही नही, गांव वालों के मौलिक अधिकार को दरकिनार कर बगैर अनुमति के काम कराए जाने,कुछ गांव रिकार्ड में ही नही होने जैसे मुद्दों को लेकर जिला पंचायत उपाध्यक्ष महेश कुंजाम ने 30 अक्टूबर के आयोजित वेलपोच्चा में एकत्रित हुए ग्रामीणों को संबोधित करते हुए शासन-प्रशासन को आड़े हाथों लिया । इस दौरान उन्होनें कहा गांवें बसने बाद कब्जा कर वर्षों से अपने जीवन यापन के लिए फसल उगा रहे किसानों को जमीन का पट्टा गांव का सामुदायिक व वन संसाधन पट्टा मिलना चाहिए था । किंतु नक्सल जैसे समस्याओं के चलते वनांचल के ऐसे इलाकों में यह सब शून्य थी । बहुत से गांवों में सबसे पहले जो काम करना चाहिए ग्राम पंचायतों को वह कार्य नही करते हुए कई जटिल मुद्दों के जैसे विषयों को छोड़ दिया जाता है । जिसके चलते विवाद की स्थिति बन जाती है । ग्रामीण की शिकायत के बाद बस्तरिया राज मोर्चा की टीम ने वन विभाग के अधिकारियो के साथ समन्वय बैठक स्थापित कर प्रमुख शिकायतों और बातों को सुन ग्रामीणों के मांगों के अनुरूप आगे की कार्रवाई करने का निर्णय लिया ।
एडवोकेट भीमा सहित समुदाय के पदाधिकारी ने आदिवासी की शक्तियों को गिनाते नियम कानून बताए

कानूनी सलाहकार एडवोकेट पोडियाम भीमा ने ग्रामीण को संबोधित करते हुए पेसा कानून की शक्तियां बताते हुए कहा कितनी विडम्बना की बात है कि गांव होने के बाद भी निकार्ड में गांव नही दिखता। रोजगार के लिए आने वाले पैसों को गांव तक नही आने दिया जा रहा है । कई परिवार नक्सल समस्या के चलते गांव छोड़कर चले गए वो फिर अपने जमीन मे वापस आना चाहते है । ग्रामीण को वन जीव जंतुओं की सरंक्षण करने एवं वनों की रक्षा करने पर बल देते हुए कहा । प्रथम पंथी में आप सभी ग्राम वासियों को नियम कानूनों के बारे में जानना और उस पर अमल करना है । और अपने अधिकारों के लिए लड़ना है । चाहे उसके लिए अपने हाथों में तीन कमान ही क्यों ना लिया जाए । वन विभाग के गलत नीतियों के चलते ही यहां नक्सलवाद पनपा था । और फिर उन प्रताड़नाओं को भी नही भुला जा सकता जब फाॅरेस्ट द्वारा ग्रामीणों को यातनाएं देते थे । वन ग्रामों की सेवा करने उनके साथ सामुहिक वनों की रक्षा करना ही विभाग का प्रथम दायित्व है । बगैर वन समिति ग्राम पंचायत के अनुमति के आप उन शक्तियों को आगे कर जो कि नक्सलवाद के खात्मे के लिए बनाई गई थी, उसका प्रयोग करते हुए दशकों से बसे आदिवासियों के हक अधिकार को छीनते हुए उन्हें नही दबा सकते । वेलपोच्चा में एकत्रित सैकड़ों ग्रामीणों को कोया समाज के ब्लॉक युवा प्रभार अध्यक्ष माड़वी गणेश एवमं जनपद उपाध्यक्ष माड़वी हिड़मा ने भी संबोधित कर ग्रामीण को वन अधिकार कानून के बारे में बताया । इस दौरान लीना ओयामी जिला पंचायत सदस्य, जनपद सदस्य मुचाकी बुदरा, रवणाराव, इरफान खांन व ग्राम पंचायत के सरपंच मौजूद थे ।

मेहता पंचायत के वेलपोच्चा गांव के ग्रामीणों द्वारा विभाग के कार्य को लेकर आपत्ति जताई गई थी । जिसकी शिकायत के बाद मै और हमारी रेंज टीम यहां पहुंच ग्रामीणों की समस्याओं को सुना । ग्रामीणों की प्रमुख मांग थी कि उन्हें वनाधिकार पट्टा दिया जाए, हमारे तरफ से सर्वे करके पंचायत और वनाधिकार समिति को दे दिया गया है । प्रकरण तैयार होने बाद उन्हें वनाधिकार पट्टा दे दिया जाएगा । ग्रामीण किसानों की वैध भूमि का सर्वे रिपोर्ट दे दिया गया है जरूरत पर और सर्वे कर बीट काट रिपोर्ट दे दिया जाएगा । और वैध भूमि पर सीपीटी कार्य नही कराया जाएगा ।
नदीम कृष्ण बरिहा
उप मंडला अधिकारी – कोण्टा






