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UCC आदिवासी समाज की परंपरा और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ कोई समझौता नहीं : हरीश कवासी

ग्राम सभाओं में यूसीसी के संबंध में अपनी आपत्ति और मांग लोकतांत्रिक तरीके से दर्ज कराने की अपील

Sukma

समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर सुकमा कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरीश कवासी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कहा है कि यूसीसी आदिवासी समाज की परंपरा और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है और इसमें किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी विशिष्ट सामाजिक, सांस्कृतिक और परंपरागत व्यवस्थाएं हैं, जिन्हें नजरअंदाज कर समान कानून लागू करना उचित नहीं होगा।

कवासी ने कहा कि “यूसीसी कानून संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है, इसलिए हमें यह कानून मंजूर नहीं है।” उन्होंने 2 अक्टूबर को आयोजित ग्राम सभाओं में यूसीसी को लेकर पारित संकल्पों का समर्थन करते हुए कहा कि ग्राम सभाओं में छत्तीसगढ़ में यूसीसी लागू नहीं किए जाने की मांग उठाई गई है। साथ ही, भविष्य में यूसीसी लागू होने की स्थिति में अनुसूचित जनजाति समाज को इसके दायरे से स्पष्ट रूप से बाहर रखने की मांग की गई है।

Congress District President Harish Kawasi, Sukma

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि आदिवासी समाज की कस्टमरी लॉ, सामाजिक व्यवस्था, संस्कृति और सामुदायिक संस्थाएं उसकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। संविधान के अनुच्छेद 244, पांचवीं अनुसूची तथा पेसा कानून के प्रावधानों और भावना को ध्यान में रखते हुए इन व्यवस्थाओं का संरक्षण किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज से जुड़े कानूनों अथवा प्रावधानों में किसी भी बदलाव से पहले ग्राम सभाओं और संबंधित आदिवासी समुदायों से सार्थक परामर्श किया जाना चाहिए। आदिवासी क्षेत्रों की सामाजिक एवं सांस्कृतिक विशिष्टताओं को नजरअंदाज कर कोई कानून लागू नहीं किया जाना चाहिए।

हरीश कवासी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आदिवासी समाज से ग्राम सभाओं में यूसीसी के संबंध में अपनी आपत्ति और मांग लोकतांत्रिक तरीके से दर्ज कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की संवैधानिक एवं सांस्कृतिक विशिष्टता, परंपरागत व्यवस्था और कस्टमरी लॉ की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।

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