Sukma
कोन्टा विकास खंड शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में तीन बजे करीब एसीबी एंडी करप्शन ब्यूरो ने छापा मारी कार्रवाई की । सूचना प्राप्त होने बाद डीएसपी रमेश मड़काम एंटी करप्शन ब्यूरो टीआई फिरोज के साथ पहुंची टीम ने कोन्टा के बीईओ को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है । शिकायत कर्ता से मिली जानकारी अनुसार प्रधानपाठक कवासी सुशीला के एरियर्स के पैसे निकालने कोन्टा खंड शिक्षा अधिकारी लगातार रिश्वत की मांग कर रहे थे । चंद्रकुमार यारदा खंड शिक्षा अधिकारी ने प्रधानपाठक शिक्षिका से एरियर्स की राशि लगभग सोलह लाख रुपए निकालने के लिए पांच प्रतिशत के तौर पर 80 हजार रूपये का रिश्वत मांग रहे थे । इस कार्रवाई में शिक्षिका के पति मंगलराम जो शिक्षा विभाग में ही भृत्य के पद पर पदस्थ है ने लगातार बीईओ द्वारा रिश्वत की मांग किए जाने व परेशान करने को लेकर एसीबी को सूचना दी थी । जिसमें मंगलराम द्वारा दस हजार प्रथम किस्त के रूप में देने और बाकी का रकम बाद में देने की बात कहते हुए, एसीबी की मदद से पुरे कार्रवाई को अंजाम तक पहुंचाया । इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग को शर्मसार होना पड़ा है । पुरे मामले की पुष्टि डीएसपी एंटी करप्शन ब्यूरो रमेश मड़काम द्वारा दी गई है । साथ ही ऐसे मामलों को लेकर सजग रहने की अपील की है ।
हाल ही में कोन्टा बीईओ का लिया था प्रभार

रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए खंड शिक्षा अधिकारी हाल ही में प्रभार लिए थे । ज्ञात हो कि पूर्व में मौजूद खंड शिक्षा अधिकारी को जूनियर कहते हुए सीनियर शिक्षकों ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी । जिसके बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर जिले के सबसे सीनियर को खंड शिक्षा अधिकारी का प्रभार कुछ समय के लिए दिया गया था। फिर उन्हें हटाकर एसीबी की पकड़ में आए प्रिसिंपल को कोन्टा बीईओ का प्रभार दिया गया था । अब देखना होगा कि इस खींचमखांची और इस मामले के बाद कोन्टा खंड शिक्षा अधिकारी के तौर पर फिर किसे दिया जाता है । वहीं दुसरी ओर कोन्टा के शिक्षकों में यह भी चर्चा है कि सीनियर होने के बावजुद बार-बार हमें जूनियर के हस्ताक्षर से वेतन अहरण करना पड़ता है । जबकि जिले में कुल सोलह सीनियर स्तर के लोग मौजूद है । जिनमें से सबसे सीनियर पूर्व एस. के. दीप कोन्टा में ही हैं, और वें पहले एक बार हाईकोर्ट जाकर भी अपनी वापसी कर चुके है । गौरतलब है कि राज्य शासन व जिला प्रशासन को यहां इस बात को लेकर समझना होगा कि गुड गर्वनेंस के दावों के बीच क्यों फिर ऐसे भष्ट प्रकार के अधिकारी को जन्म देती है ।






