Sukma
कोण्टा विधानसभा क्षेत्र में जमीन के हक व मूलभूत सुविधाओं को लेकर बस्तरिया राज मोर्चा BRM के बैनर तले बड़ी पैदल मार्च की तैयारी की जा रही है । जिसके लिए लगातार बस्तरिया राज मोर्चा बीआरएम कोण्टा विकासखंड सहित जिले में बैठकें व आमसभाएं कर रही है । सोमवार 19 अक्टूबर 2026 के ग्राम पंचायत गंगलेर में बड़ी आमसभा आयोजित की गई । जिसे राजनीतिक दलों के आईनों से देखा जाए तो जिले के अंतिम सीमावर्ती पंचायतों की बड़ी आमसभा बैठक के रूप में देखा जा रहा है । इस सभा में ग्राम पंचायत गंगलेर, सिंगाराम, गोल्लापल्ली, माराईगुड़ा और किस्टाराम पंचायतों के हजारों ग्रामीण शामिल हुए। आमसभा में क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा कर सरकार और प्रशासन से इनके समाधान की मांग उठाई गई । सबसे अहम और जटिल समस्या के रूप में ग्रामीणों ने फॉरेस्ट विभाग द्वारा कराए जाने वाले सीपीटी कार्य की खुदाई तथा जमीन का पट्टा सहित मूलभूत सुविधाएं थी । ग्रामीण बिना पंचायत की अनुमति के पुश्तैनी की खेती जमीन पर वन विभाग द्वारा सीपीटी कार्य कराए जाने मुद्दों को लेकर काफी आक्रोश नजर आ रहे थे। वहीं प्रस्तावित क्षेत्र से गुजरने वाले रेल लाइन से भी अपने खेत खराब होने अब तक जमीनों का पट्टा नही देने जैसे मुद्दों को लेकर ग्रामीणआक्रोशित व चिंतित है ।

ग्राम पंचायत को मिली शक्तियों को दरकिनार करते हुए शासन-प्रशासन द्वारा लिए जा रहे निर्णयों के विरोध आगामी समय में उग्र आंदोलन कोण्टा विधानसभा में छिड़ सकती है ऐसी आशंका जताई जा रही है । इस आंदोलन धरना-प्रदर्शन में ग्रामीण पुरी तरह लामबंद होने की शपथ ले रहे हैं । सभा में अंदरूनी इलाकों की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई गई। ग्रामीणों का कहना है कि कई गांवों में बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई और जरूरत पड़ने पर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में परेशानी होती है । ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब लोगों को जरूरी सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं, तो उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय दूसरे कार्यों को प्राथमिकता क्यों दी जा रही है ।
सूखे की स्थिति और सर्वे को लेकर किसानों में नाराजगी

बीआरएम ने आरोप लगाया है कि इस वर्ष कोंटा क्षेत्र के अनेक हिस्सों में अच्छी बारिश नहीं होने से किसानों की फसल प्रभावित हो रही है । इसी मुद्दे को लेकर 7 सितंबर को कोंटा बस स्टैंड परिसर में एक बड़ी आमसभा, धरना और रैली के माध्यम से शासन-प्रशासन को चिन्हित ग्रामों को सूखाग्रस्त घोषित करने तथा राहत कार्य शुरू करने की मांग से अवगत कराया गया था। लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं होने पर नाराजगी जताई गई । और पैदल मार्च के पूर्व इस मुद्दे को लेकर बस्तरिया राज मोर्चा के युवा फेडरेशन द्वारा चक्काजाम करने की बात कही गई । आमसभा में पोलावरम परियोजना से प्रभावित होने वाले कोंटा क्षेत्र के 18 गांवों के भविष्य और पुनर्वास को लेकर भी चर्चा की गई। ग्रामीणों ने चिंता जताई कि प्रभावित परिवारों को आने वाले समय में कहां बसाया जाएगा। यदि उन्हें अंदरूनी इलाकों में बसाया गया और पर्याप्त जमीन की व्यवस्था नहीं हुई, तो भविष्य में जमीन को लेकर ग्रामीणों के बीच विवाद की स्थिति बनने । विस्थापन से पहले उचित स्थान, जमीन और पुनर्वास की स्पष्ट व्यवस्था करने की मांग उठाई गई ।
समुचित सुविधाओं के लिए शासन-प्रशासन को छह महिने का मौका : मनीष कुंजाम

तेलंगाना के खोद में बसे सुकमा जिला के सीमावर्ती ग्राम पंचायतों के साथ गंगलेर में आयोजित बड़ी बैठक व आमसभा को पूर्व विधायक बस्तरिया राज मोर्चा के संयोजक मनीष कुंजाम ने स्थानीय भाषा में संबोधित किया । इस दौरान कुंजाम ने पूर्वजों के काबिल ग्रामीण के हक नियमों पर प्रकाश डलते हुए पंचायतों के जनप्रतिनिधि पटेल पुजारी एवमं युवा जो बड़ी संख्या में उपस्थित जनों को संबोधित किया । बिजली सड़क से वंचित अंधेरे में जीवन-यापन करने वाले हजारों परिवारों से मुलाकात कर मनीष कुंजाम ने उनके सामने आने वाले जटिल को सुनते हुए । कहा ग्रामीणों की काफी समय से बिजली की मांग है, क्यूंकि तेलंगाना की कपास की खेती देकर कर यहां के लोग भी कपास की खेती कर रहे है उसके लिए बिजली जरूरी है । सड़क की समस्या सहित आम नागरिक को जीने के लिए जो बुनियाद सुविधाएं मिलनी चाहिए वह नही पहुंच रही है । नक्सल समस्या खत्म होने बाद सरकार और प्रशासन को जल्दी इन समस्याओं का समाधान करना चाहिए । वर्षो से काबिज खेतीहर किसानों को पट्टा नही मिल रहा है, वन विभाग इसमें अड़ंगा डाल रहा है । वन अधिकार कानून के तहत हर परिवार को दस एकड़ पट्टा देने का प्रावधान है । पीढ़ियों से यहां रह रहे लोगो को न्याय नही मिल रहा है । कानून में दर्ज प्रावधानों का ढ़ंग से पालन नही हो रहा है । जमीन का पट्टा के साथ साथ सामुदायिक संसाधनों का पट्टा गांव के हिसाब से देना भी सरकार का काम है । रेल लाइन जिन खेतो से जाएगा उनका पट्टा भी शासन नही दे रही है, इसको लेकर ग्रामीण चिंतित है । मनीष कुंजाम ने कहा आदिवासियों के मालिकाना हक दिलाने पैदल मार्च की तैयारी चल रही है । आदिवासियों को धमकाने तथा उनके जमीनों से बेदखल करने वाले तत्वों को छोड़ा नही जाएगा और हक की लड़ाई जारी रहेगी । इस सभा को एडवोकेट भीमा सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया और न्याय की लड़ाई में मिलकर लड़ने की बात कही । बस्तरिया राज मोर्चा के संयोजक मनीष कुंजाम, एडवोकेट भीमा, रावना राव, जनपद उपाध्यक्ष मड़वी हिड़मा, राजेश नाग, इरफान खान, लीना ओयामी सहित विभिन्न गांवों के सरपंच, पटेल, पेरमा और आंचल कमेटी के सदस्य पदाधिकारी मौजूद थे ।






