30 से अधिक ग्राम पंचायतों में सूखे की स्थिती रेल लाइन परियोजना बंद करने एवं पोलावरम से विस्थापन जैसे मुद्दों पर प्रदर्शन
Sukma
बस्तरिया राज मोर्चा के बैनर तले पूर्व विधायक मनीष कुंजाम की मुख्यअथिति में कोन्टा के अंतराज्यीय बस स्टैंड परिसर पर बड़ा धरना-प्रदर्शन कर रैली निकाला गया । तकरीबन दो हजार के आसपास विभिन्न ग्रामों से पहुंचे ग्रामीणों जनप्रतिनिधियों के साथ आयोजित इस धरना-प्रदर्शन में बस्यरिया राज मोर्चा के वक्ताओं ने कोंटा विकासखंड के लगभग आधे से अधिक क्षेत्र में इस वर्ष अल्प वर्षा होने के कारण धान की फसल बुरी तरह प्रभावित होने की बात कही । और किसानों के सामने गंभीर कृषि संकट उत्पन्न होने,30 से अधिक ग्राम पंचायतों में वर्षा की स्थिति अत्यंत चिंताजनक रहने,जिसके कारण समय पर धान की रोपाई का कार्य पूर्ण नहीं होने को लेकर शासन का ध्यानाकर्षक करते हुए प्रदर्शन किया। ऐसी परिस्थितियों में किसानों के लिए अपनी फसल को बचाना अत्यंत कठिन बताते, कोन्टा विकास खंड के किसान कृषि पर निर्भर होने अधिकांश ग्रामीण परिवारों की आजीविका खेती-किसानी पर ही आधारित होने की बात कही।

बस्तरिया राज मोर्चा ने किसानों द्वारा खेती करने के लिए विभिन्न सहकारी बैंकों एवं अन्य वित्तीय संस्थाओं से केसीसी ऋण प्राप्त किए जाने । तथा अपनी पूरी जमा-पूंजी एवं मेहनत खेती में लगा देने । फसल के नष्ट होने की स्थिति में किसानों के सामने कृषि ऋण की किस्तों एवं मूलधन का भुगतान करना अत्यंत कठिन हो जाने । इससे किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ-साथ उनके परिवारों की आजीविका भी गंभीर रूप से प्रभावित होने की आशंका जताते मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार कोन्टा को ज्ञापन सौंपा है । इस दौरान मनीष कुंजाम, रामा सोढ़ी, अराधना मरकाम, माड़वी हिड़मा, हड़मा मरकाम, रमनाराव, राजेश नाग, सोमनाथ कवासी सहित इरफान खांन दर्जनों पदाधिकारी जनप्रतिनिधि मौजूद थे ।
पोलावरम,कोत्तागुड़ा से किरंदुल तक की रेल लाइन पर आने वाले परिस्थितियों पर जाहिर की चिंता
बस्तरिया राज मोर्चा ने शासन व सत्ता पक्ष के नेताओं पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए कहा एक वर्ष बाद पोलावरम बांध परियोजना पूर्ण होना संभावित है और विस्थापन की समस्या उत्पन्न होने वाली है । 18 गांवो के लोग काफी भयभीत और चिंतित है, दूसरी ओर शासन-प्रशासन अबतक कोई सूध नहीं ले रहा है । नेताओं और अधिकारियों दौरा लगातार जारी है किंतु इस विषय के लिए दिशा और दशा तय नही की जा रही कहते इन मांगों को अपने ज्ञापन में दिया है ।

सूखे की स्थिता वाले क्षेत्र में त्वरित जांच सर्वेक्षण कर ग्राम पंचायतों को एजेंसी बनाकर राहत कार्य शुरू किया जावे।परिस्थिति को देखते हुए सहकारी बैंको का ऋण माफ किया जावे। पोलावरम बांध से प्रभावित लोगों के साथ शासन-प्रशासन चर्चा करें और उनको आश्वस्त करे कि आने वाले समय में जो भी परेशानियां होंगी, उनके सहयोग के लिए प्रशासन तत्पर रहेगी। पोलावरम बांध परियोजना से प्रभावित होने वाले 18 गांवों के प्रत्येक परिवार का विस्तृत सर्वेक्षण कर पात्र परिवारों की सूची सार्वजनिक की जाए तथा किसी भी पात्र परिवार का नाम छूटने न दिया जाए। प्रभावित परिवारों को उनकी भूमि, मकान, पेड़-पौधे, कृषि एवं अन्य परिसंपत्तियों का उचित एवं नियमानुसार मुआवजा प्रदान किया जाए तथा मुआवजा राशि का भुगतान विस्थापन से पूर्व सुनिश्चित किया जाए।
विस्थापित परिवारों के लिए ऐसी जगह पर उचित पुनर्वास व्यवस्था की जाए, जहां पेयजल, बिजली, सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी, राशन दुकान तथा अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों। जिन परिवारों की आजीविका कृषि एवं वन संसाधनों पर निर्भर है, उनके लिए विस्थापन के बाद वैकल्पिक आजीविका एवं रोजगार की ठोस व्यवस्था की जाए, ताकि विस्थापन के कारण परिवारों की आय का स्रोत समाप्त न हो। प्रभावित परिवारों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए स्कूल, छात्रावास, छात्रवृत्ति एवं अन्य शैक्षणिक सुविधाओं की व्यवस्था की जाए तथा विस्थापन के दौरान पढ़ाई जारी रखने के लिए आवश्यक सहायता दी जाए।
प्रभावित गांवों के लोगों की जल-जंगल-जमीन एवं सामाजिक-सांस्कृतिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास एवं विस्थापन की पूरी प्रक्रिया स्थानीय लोगों से चर्चा एवं सहमति के आधार पर पारदर्शी तरीके से की जाए। आने वाले समय में विस्थापन के दौरान किसी भी परिवार को बिना उचित पुनर्वास, मुआवजा एवं वैकल्पिक व्यवस्था किए जबरन हटाया न जाए।







