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Workshop of the Sixteenth Finance Commission,सोलहवें वित्त आयोग की कार्यशाला संपन्न, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने राज्यों के स्वयं के राजस्व स्त्रोतों के संकलन लाभ प्राप्त सुदृढ़ करने आग्रह किया Sarvodaya Peace March राज्यपाल से जैन मुनि राष्ट्र संत डाॅ. मणिभद्र महाराज व पदयात्रा से जुड़े संतों ने सौजन्य भेंट की सुकमा में स्कूल निर्माण में भ्रष्टाचार कांग्रेस प्रदेश सचिव दुर्गेश राय ने सरकार को घेरा Nationwide Van Mahotsav Week सीआरपीएफ ने राष्ट्रव्यापी वन महोत्सव सप्ताह’ के अवसर पर लगाए पौधे VB-G Ram Ji scheme वीबी-जी राम जी योजना का शुभारंभ, योजना में 318 प्रकार के विकास कार्य शामिल, ग्रामीण विकास को नई दिशा देगी : उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा CEO, Zila Panchayat,ग्रामीणों के मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष पहुंचे दफ्तर जिला सीईओ ने अधिकारियों को जल्द निराकरण के दिए निर्देश
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Workshop of the Sixteenth Finance Commission,सोलहवें वित्त आयोग की कार्यशाला संपन्न, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने राज्यों के स्वयं के राजस्व स्त्रोतों के संकलन लाभ प्राप्त सुदृढ़ करने आग्रह किया

Delhi

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने राज्यों से स्वयं के राजस्व स्रोतों के संकलन पर ध्यान केंद्रित करने तथा प्रदर्शन-आधारित अनुदानों का लाभ प्राप्त करने के लिए अपनी तैयारियों को सुदृढ़ करने का आग्रह किया । बीते दिन पंचायती राज मंत्रालय नई दिल्ली में सोलहवें वित्त आयोग की सिफारिशों पर राज्यों के पंचायती राज मंत्रियों की राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यशाला सोलहवें वित्त आयोग (2026 से 2031) की सिफारिशों – जिसमें वर्ष 2026 –27 से 2030–31 की अवधि के लिए ग्रामीण स्थानीय निकायों को 4,35,236 करोड़ रुपये के हस्तांतरण की अनुशंसा की गई है – के परिप्रेक्ष्य में और इनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा जारी परिचालन दिशानिर्देशों के संदर्भ में आयोजित की गई।

केंद्रीय पंचायती राज तथा मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी (एफएएचडी) मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह तथा केंद्रीय पंचायती राज एवं एफएएचडी राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल ने कार्यशाला की शोभा बढ़ाई। विचार-विमर्श में 18 राज्यों के पंचायती राज मंत्रियों ने भाग लिया, जबकि शेष राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व उनके संबंधित पंचायती राज तथा ग्रामीण विकास विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने किया। इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज, पंचायती राज मंत्रालय के अपर सचिव सुशील कुमार लोहानी सहित मंत्रालय एवं राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री रंजन  ने अपने मुख्य वक्तव्य में कहा कि विकसित पंचायत विकसित भारत की आधारशिला है। उन्होंने पूर्ववर्ती वित्त आयोगों की तुलना में सोलहवें वित्त आयोग द्वारा ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए अनुशंसित वित्तीय हस्तांतरण में अभूतपूर्व वृद्धि का उल्लेख करते हुए इसे देशभर में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को सुदृढ़ करने का एक ऐतिहासिक अवसर बताया। उन्होंने आश्वासन दिया कि कार्यशाला के दौरान प्राप्त सभी रचनात्मक सुझावों का विधिवत् परीक्षण किया जाएगा तथा जहाँ भी संभव होगा, उन्हें समाविष्ट किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से आग्रह किया कि वे आवश्यक तत्परता एवं तैयारियाँ सुनिश्चित करते हुए । वर्ष 2026–27 से 2030–31 की कार्यान्वयन अवधि के लिए सोलहवें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित ग्रामीण स्थानीय निकाय अनुदानों हेतु जारी परिचालन दिशानिर्देशों के अनुरूप कार्यों को तीव्र गति से आगे बढ़ाएँ, जिससे सोलहवें वित्त आयोग के अनुदानों का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

वित्तीय आत्मनिर्भरता के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने राज्यों से स्वयं के राजस्व स्रोतों (ओएसआर) के सृजन को बढ़ावा देने का आग्रह किया तथा बताया कि इस संबंध में मंत्रालय मॉडल ओएसआर नियम रूपरेखा तैयार कर रहा है। उन्होंने सहकारी संघवाद तथा देशभर में भविष्य के अनुरूप सक्षम पंचायतों के निर्माण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई। मंत्रालय की डिजिटल सुशासन पहलों का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पंचायतों के वित्तीय प्रशासन को सुदृढ़ करने के लिए एक स्वतंत्र डिजिटल मंच के रूप में विकसित समर्थ पंचायत पोर्टल पारदर्शिता बढ़ाने, परिचालन दक्षता में सुधार करने तथा पंचायती राज संस्थाओं में सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन को प्रोत्साहित करने में सहायक होगा। उन्होंने सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से समर्थ पंचायत पोर्टल पर शीघ्र ऑनबोर्डिंग सुनिश्चित करने तथा स्वयं के राजस्व स्रोतों (ओएसआर) के संकलन को सुदृढ़ करने का आग्रह किया, जिससे वित्तीय दृष्टि से सुदृढ़,  जवाबदेह एवं स्थायी पंचायतों का निर्माण किया जा सके ।

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