Latest News
सुकमा और कोंटा विकासखंड को मिले नए शव वाहन, कलेक्टर ने दिखाई हरी झंडी<br> नगर पंचायत चुनाव को लेकर ब्लॉक अध्यक्ष ने फूँका चुनाव बिगुल,वार्ड भ्रमण सहित मतदाता सूची में छूटे नाम जुड़वाने दिए निर्देश <br><br> सुकमा जिले के किसानों की फसल का तत्काल सर्वे कर मुआवजा दे जिला प्रशासन : मनीष कुंजाम NMMSE छात्रवृत्ति आवेदन की तारीख बढ़ी, आवेदन अब 28 तक परीक्षा 12 दिसंबर 2026 को दो पालियों में होगी राष्ट्रपति ने आपसी संवाद और सहमति से विवादों का समाधान करने पर दिया जोर,मुरिया दरबार की परंपरा को जीवित रखने का किया आह्वान राष्ट्रपति ने कहा मैं भी मांझी की बेटी हूं, आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराओं से मेरा गहरा जुड़ाव
Home » National » राष्ट्रपति ने आपसी संवाद और सहमति से विवादों का समाधान करने पर दिया जोर,मुरिया दरबार की परंपरा को जीवित रखने का किया आह्वान

राष्ट्रपति ने आपसी संवाद और सहमति से विवादों का समाधान करने पर दिया जोर,मुरिया दरबार की परंपरा को जीवित रखने का किया आह्वान

Jagdalpur

राष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिक न्यायिक व्यवस्था में समस्याओं के समाधान के लिए पुलिस, थाना और न्यायालयों का सहारा लिया जाता है। कई मामलों में न्याय प्राप्त करने की प्रक्रिया लंबी हो जाती है और इसमें समय तथा धन दोनों खर्च होते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ विवादों के समाधान में दस-बीस या तीस वर्ष तक लग जाते हैं।

उन्होंने आग्रह किया कि जहां संभव हो और कानून के अनुरूप हो, वहां समाज के लोग आपसी बातचीत, सहमति और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था के माध्यम से विवादों का समाधान करने का प्रयास करें। उन्होंने मुरिया दरबार की इस ऐतिहासिक परंपरा को बनाए रखने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई।

राष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका के अलग-अलग दायित्व हैं, जबकि आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्था में मांझी सामाजिक नेतृत्व, विवाद समाधान और सामुदायिक निर्णयों से जुड़ी अनेक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं।

आदिवासी समाज की आध्यात्मिकता और सामूहिक आस्था उसकी विशेष पहचान

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति में आध्यात्मिकता, सामूहिकता और प्रकृति के प्रति आस्था का विशेष स्थान है। गांवों में ग्राम देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की प्राचीन परंपरा रही है। समाज के लोग एकजुट होकर गांव की सुख-समृद्धि, खुशहाली, स्वास्थ्य और कल्याण की कामना करते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के पर्व-त्यौहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं हैं, बल्कि सामाजिक एकता, आपसी सहयोग और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं। समाज के लोग सामूहिक रूप से नाचते-गाते हैं, उत्सव मनाते हैं और खुशियां बांटते हैं। यही सामूहिकता आदिवासी संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति है।

नक्सलवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सामाजिक एकजुटता जरूरी

राष्ट्रपति ने नक्सलवाद की समस्या का उल्लेख करते हुए समाज के लोगों से एकजुट रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमें यह समझना होगा कि नक्सलवाद की समस्या कैसे उत्पन्न हुई और इससे समाज के लोग किस प्रकार प्रभावित हुए। उन्होंने आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि अंग्रेजी शासन और राजाओं के समय आदिवासी समाज ने अपने अधिकारों, सम्मान और अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष किया था। राष्ट्रपति ने कहा कि समाज के लोगों को दूसरों के बहकावे में आने के बजाय अपने गांव, समाज और भविष्य के संबंध में स्वयं निर्णय लेना चाहिए। यदि कोई बाहरी व्यक्ति समाज में अशांति फैलाने का प्रयास करता है, तो सभी को एकजुट होकर उसका सामना करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अकेले कठिन कार्य करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन मिल-जुलकर प्रयास करने से बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है। संगठित और मजबूत समाज को कोई भी बुरी ताकत कमजोर नहीं कर सकती।

बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाएं, विकास के साथ संस्कृति का भी करें संरक्षण

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने आदिवासी समाज से बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ समाज को आगे बढ़ना आवश्यक है। बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाएं, उन्हें पढ़ने-लिखने और जीवन में प्रगति करने का अवसर प्रदान करें। उन्होंने कहा कि समय के साथ सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाना और विकास के नए अवसरों को अपनाना जरूरी है, लेकिन इसका अर्थ अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक पहचान को त्यागना नहीं होना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि विकास और सांस्कृतिक संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। आधुनिक शिक्षा, नई सोच और विकास के अवसरों को अपनाते हुए अपनी सांस्कृतिक विरासत, रीति-रिवाजों और सामाजिक मूल्यों को सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने समाज के लोगों से अपनी जड़ों से जुड़े रहने, पारंपरिक संस्थाओं का सम्मान करने और आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति से परिचित कराने का आग्रह किया। राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार आदिवासी समाज के विकास और कल्याण के लिए सहयोग कर रही है तथा आगे भी करती रहेगी। उन्होंने समाज के लोगों से शिक्षा, सामाजिक एकता और विकास के माध्यम से सशक्त बनने का आह्वान किया।

मुरिया दरबार की परंपरा को जीवित रखने का किया आह्वान

परंपराओं को संरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज की पहचान उसकी संस्कृति, परंपराओं और सामूहिक मूल्यों से होती है। चाहे इन परंपराओं का उल्लेख सरकारी अभिलेखों में हो अथवा न हो, समाज के लोगों को अपनी सामाजिक संस्थाओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की परंपरागत व्यवस्था में आपसी भाईचारा, प्रेम, सद्भाव, सामाजिक न्याय और सुशासन की भावना निहित है। इन मूल्यों को बनाए रखना वर्तमान और भावी पीढ़ियों की सामूहिक जिम्मेदारी है। अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने बस्तर के आदिवासी समाज से मिले स्नेह, सम्मान और आत्मीय स्वागत के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आप सभी के बीच आकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हुई है। अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति आपका समर्पण प्रेरणादायक है।

इस दौरान राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को काष्ठ कला की कलाकृति को स्मृति चिह्न भेंट किया गया।

इस गरिमामयी अवसर पर बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष व सांसद महेश कश्यप, उपाध्यक्ष बलराम मांझी, फरसपाल के मांझी अर्जुन मांझी, हमीरगढ़ के मांझी शशिभूषण मांझी और किलेपाल के गंगाधर मांझी ने भी अपने विचार व्यक्त कर बस्तर दशहरा पर्व के ऐतिहासिक मुरिया दरबार में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति के प्रति कृतज्ञता प्रकट किया। इस दौरान बस्तर राज परिवार के सदस्य कमलचन्द्र भंजदेव, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, वन मंत्री केदार कश्यप, कांकेर सांसद भोजराज नाग, जगदलपुर विधायक  किरण सिंह देव, महापौर संजय पाण्डे सहित मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी बीएन मीणा, कलेक्टर आकाश छिकारा, एसपी शलभ सिन्हा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, पारंपरिक मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरिन, नाइक-पाइक और बस्तर दशहरा समिति के सदस्य एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


Share:

Leave a Comment

Other Post