Sukma
सेकेंड बटालियन केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के 78वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में बड़े ही हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ एक भव्य मेले का आयोजन किया गया । इस कार्यक्रम का नेतृत्व रतिकांत बेहरा कमांडेंट सेकेंड बटालियन ने किया । यह आयोजन सीआरपीएफ के गौरवशाली इतिहास, उसकी वीरता एवं राष्ट्र सेवा को समर्पित था । इस विशेष अवसर पर आनंद सिंह राजपुरोहित, पुलिस उपमहानिरीक्षक, सुकमा रेंज, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे । उनके साथ श्रीमती अरुण राजपुरोहित को गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में आमंत्रित किया गया । जबकि धन सिंह बिष्ट, कमांडेंट, 226 बटालियन, विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे ।
इसके अतिरिक्त, कई वरिष्ठ अधिकारी भी इस आयोजन में सम्मिलित हुए । जिनमें प्रमुख रूप से शामिल सुरेश सिंह पायल, द्वितीय कमान अधिकारी, पवन कुमार, द्वितीय कमान अधिकारी, रान विजय, द्वितीय कमान अधिकारी अन्य अधिकारीगण एवं जवान उपस्थित रहे।

मेले में विभिन्न सांस्कृतिक एवं मनोरंजक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया । जिससे जवानों को एक सकारात्मक एवं आनंद दायक माहौल प्रदान किया गया। इस अवसर पर मल्लखंब और खेल-कूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया । जिसमें जवानों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपने कौशल का प्रदर्शन किया । मेले का एक प्रमुख आकर्षण विविध प्रकार के भोजन के स्टाल थे, जहाँ पारंपरिक और आधुनिक व्यंजनों का भरपूर आनंद लिया गया । इन स्टालों में विभिन्न राज्यों के स्वादिष्ट व्यंजन परोसे गए, जिनमें शामिल छोले-भटूरे, इडली, लस्सी, चाट,पकौड़ी,गुलाब जामुन,रसगुल्ले,जलेबी रहे । जवानों ने इन स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद उठाया और इस आयोजन को यादगार बनाया।
मुख्य अतिथि श्री आनंद सिंह राजपुरोहित ने अपने संबोधन में सीआरपीएफ के वीर जवानों के त्याग, समर्पण एवं कर्तव्यनिष्ठा की सराहना की। उन्होंने बल की वीरता, अनुशासन एवं राष्ट्र सेवा की भावना को सम्मानित करते हुए सभी अधिकारियों एवं जवानों को उनके अद्वितीय योगदान के लिए बधाई दी ।
समारोह के अंत में, विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए गए । साथ ही, उन जवानों को सम्मानित किया गया जिन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में विशेष योगदान दिया।
सेकेंड बटालियन सीआरपीएफ के 78वें स्थापना दिवस का यह भव्य आयोजन सभी के लिए प्रेरणादायक एवं स्मरणीय रहा । यह उत्सव बल की एकता, अनुशासन एवं समर्पण को दर्शाने वाला था। जो सीआरपीएफ की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुआ ।